राष्ट्र गीत - वन्दे मातरम्
राष्ट्र गीत - वन्दे मातरम्
भारत का राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् है जिसे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा १८८२में आनन्दमठ् उपन्यास में लिखा गया। वास्तव में, इसे दो भाषाओं में लिखा गया था बंगाली और संस्कृत।
➡ ७ नवम्वर १८७६ बंगाल के कांतल पाडा गांव में बंकिम चन्द्र चटर्जी ने ‘वंदे मातरम’ की रचना की।
➡ बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट थे। वो एक सरकारी अधिकारी थे जब उन्होंने “वन्दे मातरम् ” गीत बनाया।
➡ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिये इस गीत ने प्रेरणास्रोत का कार्य किया। ये बहुत ही शक्तिशाली है और अभी भी हमें अपने देश की खुशहाली के लिये लड़ने की प्रेरणा देता है।
➡ इसे पहली बार १८९६ में रविन्द्रनाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अधिवेशन में गाया था ।
➡ कलकत्ता के दूसरे काँग्रेस मीटिंग के दौरान पाँच साल के बाद इसे १९०१ में धकिना चरन सेन द्वारा पुनः गाया गया था।
➡ १९०५ में, बनारस में काँग्रेस की मीटिंग में इसे दुबारा महान कवयित्री सरला देवी चौधरानी द्वारा गाया गया।
➡ इसी नाम से लाला लाजपत राय द्वारा एक पत्रिका की शुरुआत हुई और
➡ १९०५ में ही इसी नाम से हीरालाल सेन द्वारा एक राजनीतिक फिल्म बनायी गई।
➡ १९०७ में भिकाईजी कामा द्वारा भारत का ध्वज पहले संस्करण के केन्द्र में वन्दे मातरम् लिखा गया था।
➡ १४ अगस्त १९४७ की रात्रि में संविधान सभा की पहली बैठक का प्रारंभ ‘वंदे मातरम’ के साथ और समापन ‘जन गण मन..’ के साथ..।
➡ १९५० ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत और ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान बना।
➡ २००२ बी.बी.सी. के एक सर्वेक्षण के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ विश्व का दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय गीत।
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“वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां, मलयजशीतलाम्,
शश्यश्यालालां, मातरं!
सुब्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
पुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्
सुहासिनीं, सुमधुर भाषिनीम्,
सुखदां वरदां मातरं!
सप्त-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद कराले
कोट-भुजैधृत-खरकरवावाले,
अबला केन माएत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं मातरम्।।
तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वम् हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडि
मन्दिरे-मन्दिरे
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधरिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्
नमामि कमलाम्
अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलाम् मातरम्।।
वन्दे मातरम्।
श्यामलाम् सरलाम्
सुस्मिताम् भुषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।“
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हिन्दी में भारत के राष्ट्रगीत का अर्थ
जलवायु अन्न सुमधुर, फलफूल दायिनी माँ!, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!
अति शुभ्र ज्योत्सना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।
यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
कसकर कमर खड़े है, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।
अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।
अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।
गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
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➡ वंदे मातरम् का अंग्रेजी अनुवाद सबसे पहले अरविंद घोष ने किया।
भारत का राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् है जिसे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा १८८२में आनन्दमठ् उपन्यास में लिखा गया। वास्तव में, इसे दो भाषाओं में लिखा गया था बंगाली और संस्कृत।
➡ ७ नवम्वर १८७६ बंगाल के कांतल पाडा गांव में बंकिम चन्द्र चटर्जी ने ‘वंदे मातरम’ की रचना की।
➡ बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट थे। वो एक सरकारी अधिकारी थे जब उन्होंने “वन्दे मातरम् ” गीत बनाया।
➡ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिये इस गीत ने प्रेरणास्रोत का कार्य किया। ये बहुत ही शक्तिशाली है और अभी भी हमें अपने देश की खुशहाली के लिये लड़ने की प्रेरणा देता है।
➡ इसे पहली बार १८९६ में रविन्द्रनाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अधिवेशन में गाया था ।
➡ कलकत्ता के दूसरे काँग्रेस मीटिंग के दौरान पाँच साल के बाद इसे १९०१ में धकिना चरन सेन द्वारा पुनः गाया गया था।
➡ १९०५ में, बनारस में काँग्रेस की मीटिंग में इसे दुबारा महान कवयित्री सरला देवी चौधरानी द्वारा गाया गया।
➡ इसी नाम से लाला लाजपत राय द्वारा एक पत्रिका की शुरुआत हुई और
➡ १९०५ में ही इसी नाम से हीरालाल सेन द्वारा एक राजनीतिक फिल्म बनायी गई।
➡ १९०७ में भिकाईजी कामा द्वारा भारत का ध्वज पहले संस्करण के केन्द्र में वन्दे मातरम् लिखा गया था।
➡ १४ अगस्त १९४७ की रात्रि में संविधान सभा की पहली बैठक का प्रारंभ ‘वंदे मातरम’ के साथ और समापन ‘जन गण मन..’ के साथ..।
➡ १९५० ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत और ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान बना।
➡ २००२ बी.बी.सी. के एक सर्वेक्षण के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ विश्व का दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय गीत।
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“वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां, मलयजशीतलाम्,
शश्यश्यालालां, मातरं!
सुब्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
पुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्
सुहासिनीं, सुमधुर भाषिनीम्,
सुखदां वरदां मातरं!
सप्त-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद कराले
कोट-भुजैधृत-खरकरवावाले,
अबला केन माएत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं मातरम्।।
तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वम् हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडि
मन्दिरे-मन्दिरे
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधरिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्
नमामि कमलाम्
अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलाम् मातरम्।।
वन्दे मातरम्।
श्यामलाम् सरलाम्
सुस्मिताम् भुषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।“
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हिन्दी में भारत के राष्ट्रगीत का अर्थ
जलवायु अन्न सुमधुर, फलफूल दायिनी माँ!, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!
अति शुभ्र ज्योत्सना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।
यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
कसकर कमर खड़े है, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।
अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।
अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।
गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
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➡ वंदे मातरम् का अंग्रेजी अनुवाद सबसे पहले अरविंद घोष ने किया।
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